Sunday, November 4, 2012
दूध
प्रस्तुति : दैनिक भास्कर
यह दूध कुछ खास है। तभी तो इसकी कीमत 75 रुपए प्रति लीटर है। इसके ग्राहकों में शामिल हैं पुणे और मुंबई की 4 हजार से ज्यादा नामी हस्तियां।
मसलन मुकेश अंबानी, सचिन तेंडुलकर, रितिक रोशन, शिल्पा शेट्टी, आदि गोदरेज, गरवारे, शबाना आजमी आदि। पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड दूध उत्पादन की प्रक्रिया में इंसानी हाथों का स्पर्श कतई नहीं है। सब तरह के रसायनों से मुक्त ऑर्गनिक दूध।
यह दूध गायों का है और गायों का रुतबा भी ‘वीआईपी’ से कम नहीं है। खानपान और रहन-सहन सब कुछ आलीशान। भीमाशंकर के पास स्थित 35 करोड़ रुपए लागत के इस फार्म की हर गाय के लिए कॉयरफोम का केरल से मंगाया रबर-कोटिंग वाला खास गद्दा है।
हरेक की कीमत सात हजार रुपए। खाने में अल्फा-अल्फा घास, ओट्स, कॉटनसीड्स जैसी हाईप्रोटीन डाइट का बुफे। रोज नहाने के लिए मल्टीजेट शॉवर।
वे 35 एकड़ के फॉर्म में खुला घूमती हैं। उनके रहने के लिए अलग जगह है, खाने की अलग और सोने के लिए एकदम अलग। डेयरी के अध्यक्ष देवेंद्र शहा कहते हैं, ‘हमारे उपभोक्ता क्वालिटी के प्रति बेहद जागरूक हैं।
Thursday, March 8, 2012
संघर्ष को सलाम
Source: dainik bhaskar news
भोपाल। मेरी आवाज मेरी पहचान : शुभ्रा खरे, उद्घोषक
8 साल बाद एंकरिंग की दुनिया में लौटीं, फिर पाया मुकाम बनाई पहचान
शुभ्रा खरे ने लगभग 8 साल बाद एंकरिंग दोबारा शुरू की। वें एमए प्रीवियस की पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान शादी और फिर बेटियों ऐश्वर्या और समृद्धि के हो जाने के कारण जॉब छोड़ना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों को सफलता पूर्वक निभाने के बाद एक बार फिर उन्होंने माइक को थामा। टीवी और आकाशवाणी में संचालन का दायित्व निभाया। सफर थोड़ा कठिन था, आठ सालों में संचालन की दुनिया बदल
चुकी थी।
कोशिश : परिवार और हॉबी एक साथ..
माइक पर सधे हुए शब्द और सम्मोहक आवाज के कारण शुभ्रा एक बार फिर आकाशवाणी पर अपनी आवाज और प्रस्तुतिकरण के अंदाज से जादू बिखेर रही हैं। शुभ्रा ने बेटियों के पालनपोषण के कारण एमए प्रीवियस की पढ़ाई के बाद ब्रेक लिया और लंबे समय बाद एमए फाइनल किया।
फैमिली सपोर्ट मेरी स्ट्रेंथ : डॉ. लता सिंह मुंशी, नृत्यांगना
3 साल बाद लौटीं अब एमएलबी गल्र्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर
डॉ. लता सिंह मुंशी प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना और एमएलबी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. लता ने बताया कि 1998 में मुझे भारत सरकार के द्वारा चाइना में इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में परफार्म करने का मौका मिला। उसी दौरान मैं प्रेग्नेंट थी। मैंने उस शो को छोड़ दिया। क्योंकि मुझे ईश्वर की अनुपम कृति मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करना था। मुझे हाइपोथायराइड था। बहुत मुश्किल से बेटा यमन हुआ।
इरादा : जो चाहा वो कर पाई
डॉ. लता बताती हैं मैंने तीन साल तक अपने डांस के करियर को छोड़ दिया। उसके बाद मैंने पति श्याम जी के सपोर्ट से अपनी डांस की प्रेक्ट्सि शुरू की। मैंने पैसों के लिए नहीं बल्कि खुद की पहचान बनाने के लिए दोबारा करियर को चुना। फिर सें भरतनाट्यम शुरू किया, आज बेहद खुश हूं।
5 साल बाद मिली स्पीड : अपराजिता अग्रवाल, क्रिएटिव हेड
5 साल बाद लौटी एड एजेंसी के प्रोफेशन में, जाना माना नाम बन चुकी हैं
अपराजिता अग्रवाल ने अपनी विलपावर से न केवल एक्सीडेंट के बाद रिकवर किया, बल्कि एड कंपनी में क्रिएटिव हेड के रूप में काम कर रही हैं, साथ ही पत्नी, मां और कारपोरेट वुमन के रूप में बेतहर तालमेल के साथ सफलता हासिल कर रही हैं। अपराजिता ने बताया कि 1995 में एमए गोल्ड मैडलिस्ट होने के बाद मैं एमफिल कर रही थीं तभी मेरा एक्सीडेंट हो गया। बड़ी मुश्किल से रिकवर हुआ। फैमिली के सपोर्ट ने मुझे ताकत दी।
विश्वास : भरोसे की जीत
वे बताती हैं मैंने बेटी शिवानी और अदित्रि के जन्म के समय ब्रेक लिया। दोनों बार मैं अलग प्रोफाइल में काम कर रही थी। एक में जॉब एक में बिजनेस वुमन। उसके बाद क्रिएटिव आर्ट में रूचि होने के कारण एडवरटाइजमेंट की फील्ड में आई। वहां डिजाइनिंग में क्रिएटिव हेड हूं।
बैलेंस फैमिली एंड प्रोफेशन : श्वेता जोशी (शर्मा), शिक्षिका
2 साल बाद लौटी अब फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरॉर पोस्ट पर हैं
श्वेता जोशी (शर्मा) ने कॉस्ट्यूम टेक्नोलॉजी एंड ड्रेस मेकिंग में पढ़ाई करने के बाद 2006 में वूमेंस पॉलीटेक्निक कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में जॉब जॉइन किया। लेकिन 2009 में प्रेगनेंसी की वजह से ब्रेक लिया। दो साल ब्रेक लेने के बाद फिर फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरार के रूप में काम कर रही हैं। परिवार और टीचिंग में बैलेंस बिठाते हुए अपने दायित्व का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रही श्वेता जोशी (शर्मा) एक मिसाल हैं।
मेहनत न थकीं न रुकीं
वे कहती हैं जॉब में ब्रेक लेने की वजह से एजुकेशन को ब्रेक नहीं किया। मैंने एमएसी न्यूट्रीशियन में किया। डाइटीशियन का कोर्स किया। अब बेटा ढाई साल का है। मैं जॉब कर रही हूं। साथ ही एमएससी टेक्सटाइल के बाद पीएचडी भी करूंगी, ताकि अपने बच्चों को भी बेहतर गाइड कर सकूं।
भोपाल। मेरी आवाज मेरी पहचान : शुभ्रा खरे, उद्घोषक
8 साल बाद एंकरिंग की दुनिया में लौटीं, फिर पाया मुकाम बनाई पहचान
शुभ्रा खरे ने लगभग 8 साल बाद एंकरिंग दोबारा शुरू की। वें एमए प्रीवियस की पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान शादी और फिर बेटियों ऐश्वर्या और समृद्धि के हो जाने के कारण जॉब छोड़ना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों को सफलता पूर्वक निभाने के बाद एक बार फिर उन्होंने माइक को थामा। टीवी और आकाशवाणी में संचालन का दायित्व निभाया। सफर थोड़ा कठिन था, आठ सालों में संचालन की दुनिया बदल
चुकी थी।
कोशिश : परिवार और हॉबी एक साथ..
माइक पर सधे हुए शब्द और सम्मोहक आवाज के कारण शुभ्रा एक बार फिर आकाशवाणी पर अपनी आवाज और प्रस्तुतिकरण के अंदाज से जादू बिखेर रही हैं। शुभ्रा ने बेटियों के पालनपोषण के कारण एमए प्रीवियस की पढ़ाई के बाद ब्रेक लिया और लंबे समय बाद एमए फाइनल किया।
फैमिली सपोर्ट मेरी स्ट्रेंथ : डॉ. लता सिंह मुंशी, नृत्यांगना
3 साल बाद लौटीं अब एमएलबी गल्र्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर
डॉ. लता सिंह मुंशी प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना और एमएलबी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. लता ने बताया कि 1998 में मुझे भारत सरकार के द्वारा चाइना में इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में परफार्म करने का मौका मिला। उसी दौरान मैं प्रेग्नेंट थी। मैंने उस शो को छोड़ दिया। क्योंकि मुझे ईश्वर की अनुपम कृति मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करना था। मुझे हाइपोथायराइड था। बहुत मुश्किल से बेटा यमन हुआ।
इरादा : जो चाहा वो कर पाई
डॉ. लता बताती हैं मैंने तीन साल तक अपने डांस के करियर को छोड़ दिया। उसके बाद मैंने पति श्याम जी के सपोर्ट से अपनी डांस की प्रेक्ट्सि शुरू की। मैंने पैसों के लिए नहीं बल्कि खुद की पहचान बनाने के लिए दोबारा करियर को चुना। फिर सें भरतनाट्यम शुरू किया, आज बेहद खुश हूं।
5 साल बाद मिली स्पीड : अपराजिता अग्रवाल, क्रिएटिव हेड
5 साल बाद लौटी एड एजेंसी के प्रोफेशन में, जाना माना नाम बन चुकी हैं
अपराजिता अग्रवाल ने अपनी विलपावर से न केवल एक्सीडेंट के बाद रिकवर किया, बल्कि एड कंपनी में क्रिएटिव हेड के रूप में काम कर रही हैं, साथ ही पत्नी, मां और कारपोरेट वुमन के रूप में बेतहर तालमेल के साथ सफलता हासिल कर रही हैं। अपराजिता ने बताया कि 1995 में एमए गोल्ड मैडलिस्ट होने के बाद मैं एमफिल कर रही थीं तभी मेरा एक्सीडेंट हो गया। बड़ी मुश्किल से रिकवर हुआ। फैमिली के सपोर्ट ने मुझे ताकत दी।
विश्वास : भरोसे की जीत
वे बताती हैं मैंने बेटी शिवानी और अदित्रि के जन्म के समय ब्रेक लिया। दोनों बार मैं अलग प्रोफाइल में काम कर रही थी। एक में जॉब एक में बिजनेस वुमन। उसके बाद क्रिएटिव आर्ट में रूचि होने के कारण एडवरटाइजमेंट की फील्ड में आई। वहां डिजाइनिंग में क्रिएटिव हेड हूं।
बैलेंस फैमिली एंड प्रोफेशन : श्वेता जोशी (शर्मा), शिक्षिका
2 साल बाद लौटी अब फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरॉर पोस्ट पर हैं
श्वेता जोशी (शर्मा) ने कॉस्ट्यूम टेक्नोलॉजी एंड ड्रेस मेकिंग में पढ़ाई करने के बाद 2006 में वूमेंस पॉलीटेक्निक कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में जॉब जॉइन किया। लेकिन 2009 में प्रेगनेंसी की वजह से ब्रेक लिया। दो साल ब्रेक लेने के बाद फिर फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरार के रूप में काम कर रही हैं। परिवार और टीचिंग में बैलेंस बिठाते हुए अपने दायित्व का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रही श्वेता जोशी (शर्मा) एक मिसाल हैं।
मेहनत न थकीं न रुकीं
वे कहती हैं जॉब में ब्रेक लेने की वजह से एजुकेशन को ब्रेक नहीं किया। मैंने एमएसी न्यूट्रीशियन में किया। डाइटीशियन का कोर्स किया। अब बेटा ढाई साल का है। मैं जॉब कर रही हूं। साथ ही एमएससी टेक्सटाइल के बाद पीएचडी भी करूंगी, ताकि अपने बच्चों को भी बेहतर गाइड कर सकूं।
संघर्ष को सलाम
Source: dainik bhaskar news
भोपाल। मेरी आवाज मेरी पहचान : शुभ्रा खरे, उद्घोषक
8 साल बाद एंकरिंग की दुनिया में लौटीं, फिर पाया मुकाम बनाई पहचान
शुभ्रा खरे ने लगभग 8 साल बाद एंकरिंग दोबारा शुरू की। वें एमए प्रीवियस की पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान शादी और फिर बेटियों ऐश्वर्या और समृद्धि के हो जाने के कारण जॉब छोड़ना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों को सफलता पूर्वक निभाने के बाद एक बार फिर उन्होंने माइक को थामा। टीवी और आकाशवाणी में संचालन का दायित्व निभाया। सफर थोड़ा कठिन था, आठ सालों में संचालन की दुनिया बदल
चुकी थी।
कोशिश : परिवार और हॉबी एक साथ..
माइक पर सधे हुए शब्द और सम्मोहक आवाज के कारण शुभ्रा एक बार फिर आकाशवाणी पर अपनी आवाज और प्रस्तुतिकरण के अंदाज से जादू बिखेर रही हैं। शुभ्रा ने बेटियों के पालनपोषण के कारण एमए प्रीवियस की पढ़ाई के बाद ब्रेक लिया और लंबे समय बाद एमए फाइनल किया।
फैमिली सपोर्ट मेरी स्ट्रेंथ : डॉ. लता सिंह मुंशी, नृत्यांगना
3 साल बाद लौटीं अब एमएलबी गल्र्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर
डॉ. लता सिंह मुंशी प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना और एमएलबी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. लता ने बताया कि 1998 में मुझे भारत सरकार के द्वारा चाइना में इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में परफार्म करने का मौका मिला। उसी दौरान मैं प्रेग्नेंट थी। मैंने उस शो को छोड़ दिया। क्योंकि मुझे ईश्वर की अनुपम कृति मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करना था। मुझे हाइपोथायराइड था। बहुत मुश्किल से बेटा यमन हुआ।
इरादा : जो चाहा वो कर पाई
डॉ. लता बताती हैं मैंने तीन साल तक अपने डांस के करियर को छोड़ दिया। उसके बाद मैंने पति श्याम जी के सपोर्ट से अपनी डांस की प्रेक्ट्सि शुरू की। मैंने पैसों के लिए नहीं बल्कि खुद की पहचान बनाने के लिए दोबारा करियर को चुना। फिर सें भरतनाट्यम शुरू किया, आज बेहद खुश हूं।
5 साल बाद मिली स्पीड : अपराजिता अग्रवाल, क्रिएटिव हेड
5 साल बाद लौटी एड एजेंसी के प्रोफेशन में, जाना माना नाम बन चुकी हैं
अपराजिता अग्रवाल ने अपनी विलपावर से न केवल एक्सीडेंट के बाद रिकवर किया, बल्कि एड कंपनी में क्रिएटिव हेड के रूप में काम कर रही हैं, साथ ही पत्नी, मां और कारपोरेट वुमन के रूप में बेतहर तालमेल के साथ सफलता हासिल कर रही हैं। अपराजिता ने बताया कि 1995 में एमए गोल्ड मैडलिस्ट होने के बाद मैं एमफिल कर रही थीं तभी मेरा एक्सीडेंट हो गया। बड़ी मुश्किल से रिकवर हुआ। फैमिली के सपोर्ट ने मुझे ताकत दी।
विश्वास : भरोसे की जीत
वे बताती हैं मैंने बेटी शिवानी और अदित्रि के जन्म के समय ब्रेक लिया। दोनों बार मैं अलग प्रोफाइल में काम कर रही थी। एक में जॉब एक में बिजनेस वुमन। उसके बाद क्रिएटिव आर्ट में रूचि होने के कारण एडवरटाइजमेंट की फील्ड में आई। वहां डिजाइनिंग में क्रिएटिव हेड हूं।
बैलेंस फैमिली एंड प्रोफेशन : श्वेता जोशी (शर्मा), शिक्षिका
2 साल बाद लौटी अब फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरॉर पोस्ट पर हैं
श्वेता जोशी (शर्मा) ने कॉस्ट्यूम टेक्नोलॉजी एंड ड्रेस मेकिंग में पढ़ाई करने के बाद 2006 में वूमेंस पॉलीटेक्निक कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में जॉब जॉइन किया। लेकिन 2009 में प्रेगनेंसी की वजह से ब्रेक लिया। दो साल ब्रेक लेने के बाद फिर फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरार के रूप में काम कर रही हैं। परिवार और टीचिंग में बैलेंस बिठाते हुए अपने दायित्व का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रही श्वेता जोशी (शर्मा) एक मिसाल हैं।
मेहनत न थकीं न रुकीं
वे कहती हैं जॉब में ब्रेक लेने की वजह से एजुकेशन को ब्रेक नहीं किया। मैंने एमएसी न्यूट्रीशियन में किया। डाइटीशियन का कोर्स किया। अब बेटा ढाई साल का है। मैं जॉब कर रही हूं। साथ ही एमएससी टेक्सटाइल के बाद पीएचडी भी करूंगी, ताकि अपने बच्चों को भी बेहतर गाइड कर सकूं।
भोपाल। मेरी आवाज मेरी पहचान : शुभ्रा खरे, उद्घोषक
8 साल बाद एंकरिंग की दुनिया में लौटीं, फिर पाया मुकाम बनाई पहचान
शुभ्रा खरे ने लगभग 8 साल बाद एंकरिंग दोबारा शुरू की। वें एमए प्रीवियस की पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान शादी और फिर बेटियों ऐश्वर्या और समृद्धि के हो जाने के कारण जॉब छोड़ना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों को सफलता पूर्वक निभाने के बाद एक बार फिर उन्होंने माइक को थामा। टीवी और आकाशवाणी में संचालन का दायित्व निभाया। सफर थोड़ा कठिन था, आठ सालों में संचालन की दुनिया बदल
चुकी थी।
कोशिश : परिवार और हॉबी एक साथ..
माइक पर सधे हुए शब्द और सम्मोहक आवाज के कारण शुभ्रा एक बार फिर आकाशवाणी पर अपनी आवाज और प्रस्तुतिकरण के अंदाज से जादू बिखेर रही हैं। शुभ्रा ने बेटियों के पालनपोषण के कारण एमए प्रीवियस की पढ़ाई के बाद ब्रेक लिया और लंबे समय बाद एमए फाइनल किया।
फैमिली सपोर्ट मेरी स्ट्रेंथ : डॉ. लता सिंह मुंशी, नृत्यांगना
3 साल बाद लौटीं अब एमएलबी गल्र्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर
डॉ. लता सिंह मुंशी प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना और एमएलबी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. लता ने बताया कि 1998 में मुझे भारत सरकार के द्वारा चाइना में इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में परफार्म करने का मौका मिला। उसी दौरान मैं प्रेग्नेंट थी। मैंने उस शो को छोड़ दिया। क्योंकि मुझे ईश्वर की अनुपम कृति मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करना था। मुझे हाइपोथायराइड था। बहुत मुश्किल से बेटा यमन हुआ।
इरादा : जो चाहा वो कर पाई
डॉ. लता बताती हैं मैंने तीन साल तक अपने डांस के करियर को छोड़ दिया। उसके बाद मैंने पति श्याम जी के सपोर्ट से अपनी डांस की प्रेक्ट्सि शुरू की। मैंने पैसों के लिए नहीं बल्कि खुद की पहचान बनाने के लिए दोबारा करियर को चुना। फिर सें भरतनाट्यम शुरू किया, आज बेहद खुश हूं।
5 साल बाद मिली स्पीड : अपराजिता अग्रवाल, क्रिएटिव हेड
5 साल बाद लौटी एड एजेंसी के प्रोफेशन में, जाना माना नाम बन चुकी हैं
अपराजिता अग्रवाल ने अपनी विलपावर से न केवल एक्सीडेंट के बाद रिकवर किया, बल्कि एड कंपनी में क्रिएटिव हेड के रूप में काम कर रही हैं, साथ ही पत्नी, मां और कारपोरेट वुमन के रूप में बेतहर तालमेल के साथ सफलता हासिल कर रही हैं। अपराजिता ने बताया कि 1995 में एमए गोल्ड मैडलिस्ट होने के बाद मैं एमफिल कर रही थीं तभी मेरा एक्सीडेंट हो गया। बड़ी मुश्किल से रिकवर हुआ। फैमिली के सपोर्ट ने मुझे ताकत दी।
विश्वास : भरोसे की जीत
वे बताती हैं मैंने बेटी शिवानी और अदित्रि के जन्म के समय ब्रेक लिया। दोनों बार मैं अलग प्रोफाइल में काम कर रही थी। एक में जॉब एक में बिजनेस वुमन। उसके बाद क्रिएटिव आर्ट में रूचि होने के कारण एडवरटाइजमेंट की फील्ड में आई। वहां डिजाइनिंग में क्रिएटिव हेड हूं।
बैलेंस फैमिली एंड प्रोफेशन : श्वेता जोशी (शर्मा), शिक्षिका
2 साल बाद लौटी अब फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरॉर पोस्ट पर हैं
श्वेता जोशी (शर्मा) ने कॉस्ट्यूम टेक्नोलॉजी एंड ड्रेस मेकिंग में पढ़ाई करने के बाद 2006 में वूमेंस पॉलीटेक्निक कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में जॉब जॉइन किया। लेकिन 2009 में प्रेगनेंसी की वजह से ब्रेक लिया। दो साल ब्रेक लेने के बाद फिर फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरार के रूप में काम कर रही हैं। परिवार और टीचिंग में बैलेंस बिठाते हुए अपने दायित्व का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रही श्वेता जोशी (शर्मा) एक मिसाल हैं।
मेहनत न थकीं न रुकीं
वे कहती हैं जॉब में ब्रेक लेने की वजह से एजुकेशन को ब्रेक नहीं किया। मैंने एमएसी न्यूट्रीशियन में किया। डाइटीशियन का कोर्स किया। अब बेटा ढाई साल का है। मैं जॉब कर रही हूं। साथ ही एमएससी टेक्सटाइल के बाद पीएचडी भी करूंगी, ताकि अपने बच्चों को भी बेहतर गाइड कर सकूं।
संघर्ष को सलाम
Source: dainik bhaskar news | Last Updated 01:08(08/03/12)
भोपाल। मेरी आवाज मेरी पहचान : शुभ्रा खरे, उद्घोषक
8 साल बाद एंकरिंग की दुनिया में लौटीं, फिर पाया मुकाम बनाई पहचान
शुभ्रा खरे ने लगभग 8 साल बाद एंकरिंग दोबारा शुरू की। वें एमए प्रीवियस की पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान शादी और फिर बेटियों ऐश्वर्या और समृद्धि के हो जाने के कारण जॉब छोड़ना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों को सफलता पूर्वक निभाने के बाद एक बार फिर उन्होंने माइक को थामा। टीवी और आकाशवाणी में संचालन का दायित्व निभाया। सफर थोड़ा कठिन था, आठ सालों में संचालन की दुनिया बदल
चुकी थी।
कोशिश : परिवार और हॉबी एक साथ..
माइक पर सधे हुए शब्द और सम्मोहक आवाज के कारण शुभ्रा एक बार फिर आकाशवाणी पर अपनी आवाज और प्रस्तुतिकरण के अंदाज से जादू बिखेर रही हैं। शुभ्रा ने बेटियों के पालनपोषण के कारण एमए प्रीवियस की पढ़ाई के बाद ब्रेक लिया और लंबे समय बाद एमए फाइनल किया।
फैमिली सपोर्ट मेरी स्ट्रेंथ : डॉ. लता सिंह मुंशी, नृत्यांगना
3 साल बाद लौटीं अब एमएलबी गल्र्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर
डॉ. लता सिंह मुंशी प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना और एमएलबी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. लता ने बताया कि 1998 में मुझे भारत सरकार के द्वारा चाइना में इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में परफार्म करने का मौका मिला। उसी दौरान मैं प्रेग्नेंट थी। मैंने उस शो को छोड़ दिया। क्योंकि मुझे ईश्वर की अनुपम कृति मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करना था। मुझे हाइपोथायराइड था। बहुत मुश्किल से बेटा यमन हुआ।
इरादा : जो चाहा वो कर पाई
डॉ. लता बताती हैं मैंने तीन साल तक अपने डांस के करियर को छोड़ दिया। उसके बाद मैंने पति श्याम जी के सपोर्ट से अपनी डांस की प्रेक्ट्सि शुरू की। मैंने पैसों के लिए नहीं बल्कि खुद की पहचान बनाने के लिए दोबारा करियर को चुना। फिर सें भरतनाट्यम शुरू किया, आज बेहद खुश हूं।
5 साल बाद मिली स्पीड : अपराजिता अग्रवाल, क्रिएटिव हेड
5 साल बाद लौटी एड एजेंसी के प्रोफेशन में, जाना माना नाम बन चुकी हैं
अपराजिता अग्रवाल ने अपनी विलपावर से न केवल एक्सीडेंट के बाद रिकवर किया, बल्कि एड कंपनी में क्रिएटिव हेड के रूप में काम कर रही हैं, साथ ही पत्नी, मां और कारपोरेट वुमन के रूप में बेतहर तालमेल के साथ सफलता हासिल कर रही हैं। अपराजिता ने बताया कि 1995 में एमए गोल्ड मैडलिस्ट होने के बाद मैं एमफिल कर रही थीं तभी मेरा एक्सीडेंट हो गया। बड़ी मुश्किल से रिकवर हुआ। फैमिली के सपोर्ट ने मुझे ताकत दी।
विश्वास : भरोसे की जीत
वे बताती हैं मैंने बेटी शिवानी और अदित्रि के जन्म के समय ब्रेक लिया। दोनों बार मैं अलग प्रोफाइल में काम कर रही थी। एक में जॉब एक में बिजनेस वुमन। उसके बाद क्रिएटिव आर्ट में रूचि होने के कारण एडवरटाइजमेंट की फील्ड में आई। वहां डिजाइनिंग में क्रिएटिव हेड हूं।
बैलेंस फैमिली एंड प्रोफेशन : श्वेता जोशी (शर्मा), शिक्षिका
2 साल बाद लौटी अब फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरॉर पोस्ट पर हैं
श्वेता जोशी (शर्मा) ने कॉस्ट्यूम टेक्नोलॉजी एंड ड्रेस मेकिंग में पढ़ाई करने के बाद 2006 में वूमेंस पॉलीटेक्निक कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में जॉब जॉइन किया। लेकिन 2009 में प्रेगनेंसी की वजह से ब्रेक लिया। दो साल ब्रेक लेने के बाद फिर फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरार के रूप में काम कर रही हैं। परिवार और टीचिंग में बैलेंस बिठाते हुए अपने दायित्व का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रही श्वेता जोशी (शर्मा) एक मिसाल हैं।
मेहनत न थकीं न रुकीं
वे कहती हैं जॉब में ब्रेक लेने की वजह से एजुकेशन को ब्रेक नहीं किया। मैंने एमएसी न्यूट्रीशियन में किया। डाइटीशियन का कोर्स किया। अब बेटा ढाई साल का है। मैं जॉब कर रही हूं। साथ ही एमएससी टेक्सटाइल के बाद पीएचडी भी करूंगी, ताकि अपने बच्चों को भी बेहतर गाइड कर सकूं।
भोपाल। मेरी आवाज मेरी पहचान : शुभ्रा खरे, उद्घोषक
8 साल बाद एंकरिंग की दुनिया में लौटीं, फिर पाया मुकाम बनाई पहचान
शुभ्रा खरे ने लगभग 8 साल बाद एंकरिंग दोबारा शुरू की। वें एमए प्रीवियस की पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान शादी और फिर बेटियों ऐश्वर्या और समृद्धि के हो जाने के कारण जॉब छोड़ना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों को सफलता पूर्वक निभाने के बाद एक बार फिर उन्होंने माइक को थामा। टीवी और आकाशवाणी में संचालन का दायित्व निभाया। सफर थोड़ा कठिन था, आठ सालों में संचालन की दुनिया बदल
चुकी थी।
कोशिश : परिवार और हॉबी एक साथ..
माइक पर सधे हुए शब्द और सम्मोहक आवाज के कारण शुभ्रा एक बार फिर आकाशवाणी पर अपनी आवाज और प्रस्तुतिकरण के अंदाज से जादू बिखेर रही हैं। शुभ्रा ने बेटियों के पालनपोषण के कारण एमए प्रीवियस की पढ़ाई के बाद ब्रेक लिया और लंबे समय बाद एमए फाइनल किया।
फैमिली सपोर्ट मेरी स्ट्रेंथ : डॉ. लता सिंह मुंशी, नृत्यांगना
3 साल बाद लौटीं अब एमएलबी गल्र्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर
डॉ. लता सिंह मुंशी प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना और एमएलबी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. लता ने बताया कि 1998 में मुझे भारत सरकार के द्वारा चाइना में इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में परफार्म करने का मौका मिला। उसी दौरान मैं प्रेग्नेंट थी। मैंने उस शो को छोड़ दिया। क्योंकि मुझे ईश्वर की अनुपम कृति मां बनने का सौभाग्य प्राप्त करना था। मुझे हाइपोथायराइड था। बहुत मुश्किल से बेटा यमन हुआ।
इरादा : जो चाहा वो कर पाई
डॉ. लता बताती हैं मैंने तीन साल तक अपने डांस के करियर को छोड़ दिया। उसके बाद मैंने पति श्याम जी के सपोर्ट से अपनी डांस की प्रेक्ट्सि शुरू की। मैंने पैसों के लिए नहीं बल्कि खुद की पहचान बनाने के लिए दोबारा करियर को चुना। फिर सें भरतनाट्यम शुरू किया, आज बेहद खुश हूं।
5 साल बाद मिली स्पीड : अपराजिता अग्रवाल, क्रिएटिव हेड
5 साल बाद लौटी एड एजेंसी के प्रोफेशन में, जाना माना नाम बन चुकी हैं
अपराजिता अग्रवाल ने अपनी विलपावर से न केवल एक्सीडेंट के बाद रिकवर किया, बल्कि एड कंपनी में क्रिएटिव हेड के रूप में काम कर रही हैं, साथ ही पत्नी, मां और कारपोरेट वुमन के रूप में बेतहर तालमेल के साथ सफलता हासिल कर रही हैं। अपराजिता ने बताया कि 1995 में एमए गोल्ड मैडलिस्ट होने के बाद मैं एमफिल कर रही थीं तभी मेरा एक्सीडेंट हो गया। बड़ी मुश्किल से रिकवर हुआ। फैमिली के सपोर्ट ने मुझे ताकत दी।
विश्वास : भरोसे की जीत
वे बताती हैं मैंने बेटी शिवानी और अदित्रि के जन्म के समय ब्रेक लिया। दोनों बार मैं अलग प्रोफाइल में काम कर रही थी। एक में जॉब एक में बिजनेस वुमन। उसके बाद क्रिएटिव आर्ट में रूचि होने के कारण एडवरटाइजमेंट की फील्ड में आई। वहां डिजाइनिंग में क्रिएटिव हेड हूं।
बैलेंस फैमिली एंड प्रोफेशन : श्वेता जोशी (शर्मा), शिक्षिका
2 साल बाद लौटी अब फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरॉर पोस्ट पर हैं
श्वेता जोशी (शर्मा) ने कॉस्ट्यूम टेक्नोलॉजी एंड ड्रेस मेकिंग में पढ़ाई करने के बाद 2006 में वूमेंस पॉलीटेक्निक कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में जॉब जॉइन किया। लेकिन 2009 में प्रेगनेंसी की वजह से ब्रेक लिया। दो साल ब्रेक लेने के बाद फिर फैशन टेक्नोलॉजी में लेक्चरार के रूप में काम कर रही हैं। परिवार और टीचिंग में बैलेंस बिठाते हुए अपने दायित्व का सफलता पूर्वक निर्वहन कर रही श्वेता जोशी (शर्मा) एक मिसाल हैं।
मेहनत न थकीं न रुकीं
वे कहती हैं जॉब में ब्रेक लेने की वजह से एजुकेशन को ब्रेक नहीं किया। मैंने एमएसी न्यूट्रीशियन में किया। डाइटीशियन का कोर्स किया। अब बेटा ढाई साल का है। मैं जॉब कर रही हूं। साथ ही एमएससी टेक्सटाइल के बाद पीएचडी भी करूंगी, ताकि अपने बच्चों को भी बेहतर गाइड कर सकूं।
Wednesday, March 7, 2012
मोहब्बत गांव की इस देवी का नेक काम
Source: bhaskar news
हिसार के मंगाली मोहब्बत गांव की सुमित्रा देवी की डच्यूटी सुबह दस बजे गांव में घूमकर बच्चों को इकट्ठा करने से शुरू हो जाती है। मजदूर परिवार से संबंधित सुमित्रा ने गांव की महिलाओं के लिए भी लकड़ी के मणके बनाने का काम शुरू किया।
10 महिलाओं को साथ लिया और फिर जागृति महिला समिति का गठन किया। एक के बाद एक महिला जुड़ती गई और कारवां आठ हजार का आंकड़ा पार कर गया। फिर इन महिलाओं ने अपना ज्वाइंट सेविंग अकाउंट भी खोला। जमा किए गए पैसों से महिलाओं को घरेलू स्तर पर व्यापार शुरू करने के लिए कर्ज देना शुरू किया।
समाज और देश में योगदान
पिछले दिनों सुमित्रा ने पाकिस्तान जाकर मणके से बनाई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई। पाक उद्योग मंत्री ने उन्हें दोबारा पाकिस्तान आकर महिलाओं को प्रशिक्षित करने का न्यौता दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस ग्रुप को ले जाने की कोशिश कर रही हैं।
सुमित्रा देवी, 40 साल
शिक्षा- 10वीं
कार्यकर्ता . आंगनबाड़ी, हरियाणा
कहती हैं- महिलाओं का खुद अपने पैरों पर खड़ा होना जरूरी।
हिसार के मंगाली मोहब्बत गांव की सुमित्रा देवी की डच्यूटी सुबह दस बजे गांव में घूमकर बच्चों को इकट्ठा करने से शुरू हो जाती है। मजदूर परिवार से संबंधित सुमित्रा ने गांव की महिलाओं के लिए भी लकड़ी के मणके बनाने का काम शुरू किया।
10 महिलाओं को साथ लिया और फिर जागृति महिला समिति का गठन किया। एक के बाद एक महिला जुड़ती गई और कारवां आठ हजार का आंकड़ा पार कर गया। फिर इन महिलाओं ने अपना ज्वाइंट सेविंग अकाउंट भी खोला। जमा किए गए पैसों से महिलाओं को घरेलू स्तर पर व्यापार शुरू करने के लिए कर्ज देना शुरू किया।
समाज और देश में योगदान
पिछले दिनों सुमित्रा ने पाकिस्तान जाकर मणके से बनाई वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई। पाक उद्योग मंत्री ने उन्हें दोबारा पाकिस्तान आकर महिलाओं को प्रशिक्षित करने का न्यौता दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस ग्रुप को ले जाने की कोशिश कर रही हैं।
सुमित्रा देवी, 40 साल
शिक्षा- 10वीं
कार्यकर्ता . आंगनबाड़ी, हरियाणा
कहती हैं- महिलाओं का खुद अपने पैरों पर खड़ा होना जरूरी।
Tuesday, December 27, 2011
बिहार के लाल
प्रस्तुति - दैनिक भास्कर, सत्यप्रकाश.
भागलपुर.मन में लगन के साथ कुछ करने की चाहत हो तो बेकार समझे जाने वाली चीजों से भी कुछ नया आविष्कार किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है अंग के एक लाल ने।
शहर के नाथनगर नयाटोला के निवासी निक्की कुमार झा ने विद्युत घर से निकले कोयले की राख से बिजली उत्पन्न कर फिर बचे हुए वेस्टेज राख से डैमप्रूफ सीमेंट बनाने की दिशा में एक उपलब्धि हासिल की है। सीमेंट को परीक्षण के लिए आईआइटी कानपुर एवं मद्रास भेजा गया है। जिसकी रिपोर्ट अभी आनी है।
कैसे मिली सफलता ?
वर्तमान में टीएनबी कॉलेज बीएससी भौतिकी प्रथम वर्ष के छात्र निक्की का कहना है कि उसके द्वारा बनाया गया सीमेंट बाजार से सस्ता और मजबूत है। इस सीमेंट से छत बनाया जाय तो इससे छड़ में कभी जंग नहीं लगेगा।
उन्होंने बताया कि जब राख का परीक्षण किया तो पाया कि उसमें सोडियम और कैल्शियम का ऑयन होता है। फिर उसमें सोडियम सल्फाइड को पानी में घुलाकर बाहर कर लिया और कैल्शियम सल्फाइड को रहने दिया और उचित मात्रा में जिप्स मिलाने से सीमेंट तैयार हो गया।
पिता का मिला सहयोग
इस कार्य में उनके पिता सुनील कुमार झा का भी पूरा सहयोग मिला है। उनके पिता वर्तमान में कहलगांव स्थित संत जोसफ स्कूल में भौतिकी के शिक्षक हैं। टीएनबी रसायण शास्त्र के शिक्षक प्रो. राजेश कुमार एवं नवयुग विद्यालय के शिक्षक माधवेन्द्र चौधरी ने सहयोग किया। निक्की के पिता सुनील झा व मां रीना रानी ने बताया कि उसका झुकाव बचपन से ही वैज्ञानिक प्रयोग की तरफ रहा है।
पहले भी दिखा चुका है हुनर
वर्ष 2007 में नरगा स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में निक्की उर्जा रुपान्तरण व प्रबंधन पर मॉडल तैयार कर विज्ञान मेले का टॉपर बना था। दसवीं कक्षा में वर्ष 2010 में कोयले की राख से बिजली तैयार किया। 5 दिसंबर 2010 को बिजली बनाने के बाद बचे हुए अवशिष्ट राख से डैमरोधी सीमेंट तैयार किया। निक्की ने बताया कि 200 ग्राम राख से दो बोल्ट तक बिजली पैदा की जा सकती है।
कुछ ऐसे मिली प्रेरणा
मिक्की ने बताया कि अपने पापा से अक्सर एनटीपीसी द्वारा उत्सर्जित कोयले की राख से फैल रहे प्रदूषण के बारे में वह सुनता था। इसी से प्रेरणा पाकर राख पर काम करना शुरु किया। निक्की ने बताया कि एनटीपीसी और उसके आसपास के क्षेत्रों को प्रदुषण मुक्त करने के दिशा में वह एक प्रोजेक्ट पर काम करने की सोच रहा है। जिसके डिमोस्ट्रेशन के लिए उचित मौके की तलाश में है।
है इच्छा
निक्की ने अपनी इच्छा बताते हुए कहा कि वो अपनी तमाम चीजें जिसे वह करना चाहता है वह राज्य के सीएम नीतीश कुमार के साथ बांटना चाहता है। ताकि एक सही प्लेटफार्म मिल सके। राख से बिजली बनाने के लिए निक्की को इंडियन सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ एंड इन्वायारामेंटल स्टडीज साउथ एशिया रीजन की ओर से पर्यावरण रत्न अवार्ड मिल चुका है।
भारत सरकार के सहयोग से प्रकाशित पुस्तक भूमि संसाधन एवं पृथ्वी ग्रह एनसीटीसी नेटवर्क में 2009 एवं 2010 में निक्की के दो लेख भी प्रकाशित हुए हैं। इसके अलावे वह विद्या भारती उत्तर पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय विज्ञान मेला का टॉपर रहा है। विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए कई पुरस्कार मिले हैं।
जीमेल से फेसबुक तक कंट्रोल करेगा रोबोट
निक्की वर्तमान में सुभारती विवि मेरठ का छात्र रवि कुमार के सहयोग से प्लास्टिक से इंधन निकालने एवं एक ऐसा रोबोट तैयार कर रहे हैं जो मैसेज, फोन, फेसबुक, जी-मेल आदि को भी कंट्रोल कर लेगा। निक्की की इच्छा भविष्य में न्यूक्लियर यूजन को कंट्रोल करना व इस पर नोबेल पुरस्कार जीतना है।
भागलपुर.मन में लगन के साथ कुछ करने की चाहत हो तो बेकार समझे जाने वाली चीजों से भी कुछ नया आविष्कार किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है अंग के एक लाल ने।
शहर के नाथनगर नयाटोला के निवासी निक्की कुमार झा ने विद्युत घर से निकले कोयले की राख से बिजली उत्पन्न कर फिर बचे हुए वेस्टेज राख से डैमप्रूफ सीमेंट बनाने की दिशा में एक उपलब्धि हासिल की है। सीमेंट को परीक्षण के लिए आईआइटी कानपुर एवं मद्रास भेजा गया है। जिसकी रिपोर्ट अभी आनी है।
कैसे मिली सफलता ?
वर्तमान में टीएनबी कॉलेज बीएससी भौतिकी प्रथम वर्ष के छात्र निक्की का कहना है कि उसके द्वारा बनाया गया सीमेंट बाजार से सस्ता और मजबूत है। इस सीमेंट से छत बनाया जाय तो इससे छड़ में कभी जंग नहीं लगेगा।
उन्होंने बताया कि जब राख का परीक्षण किया तो पाया कि उसमें सोडियम और कैल्शियम का ऑयन होता है। फिर उसमें सोडियम सल्फाइड को पानी में घुलाकर बाहर कर लिया और कैल्शियम सल्फाइड को रहने दिया और उचित मात्रा में जिप्स मिलाने से सीमेंट तैयार हो गया।
पिता का मिला सहयोग
इस कार्य में उनके पिता सुनील कुमार झा का भी पूरा सहयोग मिला है। उनके पिता वर्तमान में कहलगांव स्थित संत जोसफ स्कूल में भौतिकी के शिक्षक हैं। टीएनबी रसायण शास्त्र के शिक्षक प्रो. राजेश कुमार एवं नवयुग विद्यालय के शिक्षक माधवेन्द्र चौधरी ने सहयोग किया। निक्की के पिता सुनील झा व मां रीना रानी ने बताया कि उसका झुकाव बचपन से ही वैज्ञानिक प्रयोग की तरफ रहा है।
पहले भी दिखा चुका है हुनर
वर्ष 2007 में नरगा स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में निक्की उर्जा रुपान्तरण व प्रबंधन पर मॉडल तैयार कर विज्ञान मेले का टॉपर बना था। दसवीं कक्षा में वर्ष 2010 में कोयले की राख से बिजली तैयार किया। 5 दिसंबर 2010 को बिजली बनाने के बाद बचे हुए अवशिष्ट राख से डैमरोधी सीमेंट तैयार किया। निक्की ने बताया कि 200 ग्राम राख से दो बोल्ट तक बिजली पैदा की जा सकती है।
कुछ ऐसे मिली प्रेरणा
मिक्की ने बताया कि अपने पापा से अक्सर एनटीपीसी द्वारा उत्सर्जित कोयले की राख से फैल रहे प्रदूषण के बारे में वह सुनता था। इसी से प्रेरणा पाकर राख पर काम करना शुरु किया। निक्की ने बताया कि एनटीपीसी और उसके आसपास के क्षेत्रों को प्रदुषण मुक्त करने के दिशा में वह एक प्रोजेक्ट पर काम करने की सोच रहा है। जिसके डिमोस्ट्रेशन के लिए उचित मौके की तलाश में है।
है इच्छा
निक्की ने अपनी इच्छा बताते हुए कहा कि वो अपनी तमाम चीजें जिसे वह करना चाहता है वह राज्य के सीएम नीतीश कुमार के साथ बांटना चाहता है। ताकि एक सही प्लेटफार्म मिल सके। राख से बिजली बनाने के लिए निक्की को इंडियन सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ एंड इन्वायारामेंटल स्टडीज साउथ एशिया रीजन की ओर से पर्यावरण रत्न अवार्ड मिल चुका है।
भारत सरकार के सहयोग से प्रकाशित पुस्तक भूमि संसाधन एवं पृथ्वी ग्रह एनसीटीसी नेटवर्क में 2009 एवं 2010 में निक्की के दो लेख भी प्रकाशित हुए हैं। इसके अलावे वह विद्या भारती उत्तर पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय विज्ञान मेला का टॉपर रहा है। विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए कई पुरस्कार मिले हैं।
जीमेल से फेसबुक तक कंट्रोल करेगा रोबोट
निक्की वर्तमान में सुभारती विवि मेरठ का छात्र रवि कुमार के सहयोग से प्लास्टिक से इंधन निकालने एवं एक ऐसा रोबोट तैयार कर रहे हैं जो मैसेज, फोन, फेसबुक, जी-मेल आदि को भी कंट्रोल कर लेगा। निक्की की इच्छा भविष्य में न्यूक्लियर यूजन को कंट्रोल करना व इस पर नोबेल पुरस्कार जीतना है।
Monday, December 19, 2011
साइकिल के पुर्जे
प्रस्तुति : बिज़नेस ब्यूरो
भारत में एक से बढ़कर एक कर्मयोगी हैं और उनमें ज्यादातर लोगों ने जबर्दस्त मेहनत की और गजब की प्रतिबद्धता दिखाई। इसका ही नतीजा है कि वे उन ऊंचाइयों पर जा पहुंचे हैं जहां पहुंचना मुश्किल ही नहीं लगभग नामुमकिन है।
इनमें से ही एक हैं बृजमोहन लाल मुंजाल जो दुनिया की सबसी बड़ी टू व्हीलर कंपनी हीरो मोटोकॉर्प के चेयरमैन हैं। आज उनकी कुल संपत्ति 1.5 अरब डॉलर की है और वह भारत के 38 वें सबसे अमीर हैं।
उनका जन्म कमालिया में हुआ जो अब पाकिस्तान में है। बंटवारे के पहले ही वहां से अमृतसर चले आए और यहां छोटा-मोटा काम करने लगे। बाद में वह लुधियाना चले गए जहां वह अपने तीन भाइयों के साथ साइकिलों के पार्ट्स बेचने लगे। 1954 में उन्होंने पार्ट्स बेचने की बजाय साइकिलों के हैंडल, फोर्क वगैरह बनाना शुरू कर दिया। उनकी कंपनी का नाम था हीरो साइकिल्स लिमिटेड। 1956 में पंजाब सरकार ने साइकिलें बनाने का लाइसेंस जारी किया। यह लाइसेंस उनकी कंपनी को मिला और यहां से उनकी दुनिया बदल गई। पंजाब सरकार ने उन्हें लोन भी दिया और यह उनकी मेहनत का परिणाम था कि 1986 में हीरो साइकिल को दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल कंपनी माना गया।
इसके बाद उन्होंने एक टू व्हीलर कंपनी खोली जिसका नाम था हीरो मैजेस्टिक कंपनी। इसमें उन्होंने मैजेस्टिक स्कूटर बनाने शुरू किए। 1984 में उन्होंने जापान की बड़ी ऑटो कंपनी होंडा से करार किया और यहीं से उनकी दुनिया बदल गई। उन्होंने होंडा के साथ मिलकर हरियाणा के धारूहेड़ा में प्लांट लगाया। यहां हीरो होंडा मोटरसाइकिलें बननी शुरू हुईं। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी है।
81 वर्षीय बृजमोहन मुंजाल अपने बेटों पवन और सुनील के साथ हीरो समूह चला रहे हैं। उन्होंने जापानी कंपनी होंडा की कंपनी में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीद ली।
भारत में एक से बढ़कर एक कर्मयोगी हैं और उनमें ज्यादातर लोगों ने जबर्दस्त मेहनत की और गजब की प्रतिबद्धता दिखाई। इसका ही नतीजा है कि वे उन ऊंचाइयों पर जा पहुंचे हैं जहां पहुंचना मुश्किल ही नहीं लगभग नामुमकिन है।
इनमें से ही एक हैं बृजमोहन लाल मुंजाल जो दुनिया की सबसी बड़ी टू व्हीलर कंपनी हीरो मोटोकॉर्प के चेयरमैन हैं। आज उनकी कुल संपत्ति 1.5 अरब डॉलर की है और वह भारत के 38 वें सबसे अमीर हैं।
उनका जन्म कमालिया में हुआ जो अब पाकिस्तान में है। बंटवारे के पहले ही वहां से अमृतसर चले आए और यहां छोटा-मोटा काम करने लगे। बाद में वह लुधियाना चले गए जहां वह अपने तीन भाइयों के साथ साइकिलों के पार्ट्स बेचने लगे। 1954 में उन्होंने पार्ट्स बेचने की बजाय साइकिलों के हैंडल, फोर्क वगैरह बनाना शुरू कर दिया। उनकी कंपनी का नाम था हीरो साइकिल्स लिमिटेड। 1956 में पंजाब सरकार ने साइकिलें बनाने का लाइसेंस जारी किया। यह लाइसेंस उनकी कंपनी को मिला और यहां से उनकी दुनिया बदल गई। पंजाब सरकार ने उन्हें लोन भी दिया और यह उनकी मेहनत का परिणाम था कि 1986 में हीरो साइकिल को दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल कंपनी माना गया।
इसके बाद उन्होंने एक टू व्हीलर कंपनी खोली जिसका नाम था हीरो मैजेस्टिक कंपनी। इसमें उन्होंने मैजेस्टिक स्कूटर बनाने शुरू किए। 1984 में उन्होंने जापान की बड़ी ऑटो कंपनी होंडा से करार किया और यहीं से उनकी दुनिया बदल गई। उन्होंने होंडा के साथ मिलकर हरियाणा के धारूहेड़ा में प्लांट लगाया। यहां हीरो होंडा मोटरसाइकिलें बननी शुरू हुईं। आज यह दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी है।
81 वर्षीय बृजमोहन मुंजाल अपने बेटों पवन और सुनील के साथ हीरो समूह चला रहे हैं। उन्होंने जापानी कंपनी होंडा की कंपनी में 27 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीद ली।
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